गोल्डन बाबा की पहली यात्रा पर खर्च हुए थे 250 रुपये

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मेरठ :- हरिद्वार से गंगा जल लेकर जनपद की सीमा में प्रवेश कर हजारों कांवड़ यात्री निकल चुके हैं। शनिवार रात्रि एक श्रद्धालु 20 किलो सोना शरीर पर लादे नजर आया। गले में गोल्ड चेन, हाथों पर सोने के कवच और उंगलियों में रिंग्स पहने हुए था। लोग इन्हें गोल्डन बाबा के नाम से बुलाने लगे। बाबा का कहना है कि पहले मैं 11 किलो सोना पहनता था। गले के आॅपरेशन की वजह से इसे कम करना पड़ा। मेरी ये 26वीं यानि सिल्वर जुबली कांवड़ यात्रा है।

सुधीर कुमार मक्कड़ उर्फ गोल्डन बाबा का कहना है कि दिल्ली के गांधीनगर में एक सदियों पुराना सिद्धपीठ लक्षमण नारायण मंदिर है। यहां करीब 42 साल से जा रहा हूं। बचपन में मैंने कई लोगों को कांवड़ लाते हुए देखा था। इसके बाद मुझे भी शौक लगा। पहली बार जब एक कांवड़ ले गया तो 250 रुपए का खर्चा आया। अब मेरी ये 26वीं यानि सिल्वर जुबली कांवड़ यात्रा है। हरिद्वार से दिल्ली तक की इस यात्रा में करीब 500 आदमी मेरे साथ आए हैं।

गोल्ड को मानते हैं इष्ट देवता

बाबा के मुताबिक 1973 से तीन से चार तोला सोना पहनता आ रहा हूं। उस वक्त इसका मूल्य 250 रुपए प्रति तोला था। धीरे-धीरे 11 किलो पहनने लगा। फिर लोग मुझे गोल्डन बाबा बुलाने लगे। ज्यादा गोल्ड पहनने की वजह से गले की नस दब गई थी। इसके बाद आॅपरेशन हुआ इसलिए अब 25 किलो ही पहना है। गोल्ड मेरे इष्ट देवता हैं, इसलिए इनका मूल्य नहीं लगा सकता। ये मेरे लिए बहु मूल्य है, इनकी पूजा-आराधना करता हूं। पहले सिर्फ भोलेनाथ का लॉकेट गले में था, लेकिन अब सभी देवी देवताओं के लॉकेट पहनता हूं।

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